वृंदावन माँ हरित वन मच्यो शोर,
गोपियन संग रमत रास नंद किशोर।
हर गोपी संग एक एक कन्हा नाचे,
ई का जादू चलाई तूने चितचोर।
सूर असूर सबही स्वर्ग पाताल से आए,
देखन प्रभु की लीला, बहैं अखियन नीर।
सुन बखान ब्रह्मा सृष्टिकर्ता देखन माखनचोर,
शंकर विष्णु गोपियन भेस माँ, नाचैं जमुना छोर।
रैन ढले पर रास न थाके, बाजे मुरली मोर,
कान्ह हँसे, गोपी लजाएं, नाचे यमुना छोर।
"मेघ" कहे यह लीला अमर, जुग जुग रहे हुलोर,
मन बसिए ई अमृत पिने, बन जाऊं मैं भी चकोर।
गोपियन संग रमत रास नंद किशोर।
हर गोपी संग एक एक कन्हा नाचे,
ई का जादू चलाई तूने चितचोर।
सूर असूर सबही स्वर्ग पाताल से आए,
देखन प्रभु की लीला, बहैं अखियन नीर।
सुन बखान ब्रह्मा सृष्टिकर्ता देखन माखनचोर,
शंकर विष्णु गोपियन भेस माँ, नाचैं जमुना छोर।
रैन ढले पर रास न थाके, बाजे मुरली मोर,
कान्ह हँसे, गोपी लजाएं, नाचे यमुना छोर।
"मेघ" कहे यह लीला अमर, जुग जुग रहे हुलोर,
मन बसिए ई अमृत पिने, बन जाऊं मैं भी चकोर।
बुधवार, १९/८/२०२६ , १२:१५ PM
अजय सरदेसाई -मेघ
