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Wednesday, 3 June 2026

मेरे साथ खड़ा


 

माथे पर हाथ तेरा, मुझ पर कृपादृष्टि तेरी,
भवसागर से मैं तरा।
सनसनाए गरजे पवन, या घनघोर बरसें घन,
सागर की लहरें चाहे खौल उठें।
डगमगाए नैया मेरी, पर भय न मुझको ज़रा,
खेवट मेरी नाव का तू, मेरे साथ खड़ा।

अँधेरी रात घिर आए, या बिजली कड़क जाए,
तारे भी छुप जाएँ बादलों में।
दिशाएँ भटक जाएँ, राहें मिट जाएँ,
खो जाऊँ मैं अनजान जंगलों में।
तेरी ज्योति जले भीतर, मिले राह सुझरा,
दीपक मेरे मन का तू, मेरे साथ खड़ा।

जब थके हैं पाँव मेरे, टूटे हैं इरादे,
बोझ लगे साँसों का भी भारी।
आँसू पलकों पर रुके, शब्द होंठों पर झुके,
हार मान लूँ मैं, ऐसी आई बारी।
तेरा नाम लिया बस, मिली शक्ति दोबारा,
थामे बाँह जो मेरी तू, मेरे साथ खड़ा।

काँटे चुभें जो राह में, सह जाऊँ हँसकर,
ज़हर भी अमृत बने तेरे स्पर्श से।
न मृत्यु से भय लगे, न जीवन से डर,
जब तेरा आसरा है, क्या फ़िक्र किसी की।
जन्मों का बंधन यह, न टूटे न बिखरे,
नाथ मेरे जीवन का तू, मेरे साथ खड़ा।

अब न माँगूँ कुछ और मैं, न कोई आस रखूँ,
बस तेरी शरण में यह सिर झुका।
तन मिट जाए चाहे, मन बिखर जाए,
पर तेरा दामन न छूटे, यही एक दुआ।
जीते जी, मरते दम, यही है पुकारा,
सर्वस्व मेरा तू, मेरे साथ खड़ा।

बुधवार, ३ जून २०२६ , 10:10 AM
अजय सरदेसाई 'मेघ'