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Saturday, 27 June 2026

लागे दृष्टि तेरे श्रीपाद पर ( Bajan and /or Dadra )


 

लागे दृष्टि तेरे श्रीपाद पर,

तेरे आशीष तले मेरा सर।

और न दिल में कोई चाह रहे,

न ही दुनिया की कोई ख़बर॥

 

तू सिखा मुझे, प्यास भी जगा,

सब बटोरें ज्ञान, मुझे छोड़ना सिखा।

तू सर्वज्ञ है, तुझसे क्या छिपा,

जो मुझसे छिपा, वो रहस्य दिखा॥

 

कलि-संक्रमण का काल है,

और कलि अपने चरम पर।

थर-थर मैं भय से काँप रहा,

मैं शून्य हूँ, तू मुझे पूर्ण कर॥

 

 

शनिवार, २७/६/२०२६ , ७:०५ PM

अजय सरदेसाई -मेघ

Monday, 22 June 2026

हम अगर अपने घर में ना मिले


हम अगर अपने घर में न मिलें, तो तन्हाइयों से पूछो,
हम उम्मीद के हर किरण में मिलेंगे, तुम ढूँढ के देखो।

शगुफ़्ता किसी कली में नहीं, तो और कहाँ होगी,
हर कली में ये मुस्कान मिलेगी, तुम बाग़ में देखो।

बाहर जो दुनिया है, वह बस एक छलावा है,
गर असली देखने की ख़्वाहिश है, अंदर झाँक के देखो।

आँखें जो देखती हैं, अक्सर सच होता नहीं है,
सच जानने की चाहत है? तो दिल खोलकर देखो।

ज़िंदगी वो शय है जिसे समझना है मुश्किल,
गर समझना चाहते ही हो, तो उसे जी कर देखो।

किसी गैर से नफ़रत करना बड़ी बात नहीं,
अगर कुछ करना है तो, गैर को चाहकर देखो।

सोमवार, २२/६/२६ , १०:३० PM 
अजय सरदेसाई -मेघ

Sunday, 2 March 2025

नमो नमोजी शंकरा देवाधिदेव शंकरा


नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुपम तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
स्थितप्रज्ञ जो वो सांब तू
जिवन का आधार तू
कृपा की बरसात तू
चाहु जिसे वो आस तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुपम तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
आदीनाद ओंकार तू
अनंत जो वो महाकाल तू
अक्राल तू विक्राल तू
कण भी तू विशाल तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुपम तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
तू शांत भी और ऋद्ध तू
सुर असुरों का आराध्य तू
ब्रम्हांड थरथर जिसे कांपता
वो प्रलयंकारी रुद्र तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुपम तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
तुझे जाने कौन निराकार तू
तू सभी कुछ सब आकार तू
सभी मे है शिव निवास तेरा
हर जिवनिर्जिव का आधार तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुपम तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
तू श्वेत और सुंदर भी तू
भक्तों का प्रेम सागर तू
जिस सागर में है विष्णू धाम
वो आनंद का क्षिरसागर तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेरे अनुप तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
तू आत्मा और परमात्मा तू
अखंड ब्रम्हांड की विश्वात्मा तू
तू ज्ञान ज्ञानी और ज्ञानद भी तू
तू स्वयं मोक्ष और मोक्षद भी तू
 
नमो नमोजी शंकरा
देवाधिदेव शंकरा
तेतेरे अनुप तेज से
मेरे जिवन से तिमीर हरा
 
रविवार, //२५ , १२:४६ PM
अजय सरदेसाई (मेघ)

 


Thursday, 12 December 2024

फ़िक्र-ए-फ़र्दा


फ़िक्र--फ़र्दा बन्दे तू कर,

तू बस उसकी इबादत कर।

एक बार बस दिल से पुकार के देख उसे,

वक्त क्या है,मुक्कदर भी बदल जाएगा।  

हर मुराद,हर दुआ तेरी होगी कुबूल,

चाहा जो तुमने उससे भी ज्यादा मिल जाएगा।

जमीं पर तू भटकता रहा उम्र भर,

तरसता रहा तू खुशी को उम्र भर। 

खुशी तो ना मिली, मिला गम हर बदर

इस लिये कह रहा हुं मै कबसे हर बशर।

उसको दिल में जगा,उसका दीदार कर,

हाथ दुआ में उठे, फिर काहे का डर।

वो अंधेरों को रौशनी के उजालों में दे बदल,

तू देखता जा,जरा ठहर,जरा तू सबर कर।

फ़िक्र--फ़र्दा बन्दे तू कर,

तू बस उसकी इबादत कर।

एक बार बस दिल से पुकार के देख उसे,

वक्त क्या है,मुक्कदर बदल जाएगा।

हर मुराद,हर दुआ तेरी होगी कुबूल,

चाहा जो तुमने उससे भी ज्यादा तू पाएगा।

 

बुधवार ११/१२/२४ १२:३७ AM

अजय सरदेसाई (मेघ)

 

फ़िक्र--फ़र्दा = कल की चिंता

इबादत = पूजा

मुक्कदर = नसीब

बसर = शहर , ठिकाना

बशर = व्यक्ति , इंसान

दीदार = दर्शन , साक्षात्कार

दुआ  = प्रार्थना

 

Tuesday, 3 December 2024

तु कौन है बस एक बार प्रकट कर


तुझे राम कहुं या शिव कहुं
तुझे विष्णु कहुं या कृष्ण कहुं
इश्वर क्या मैं तुझे देवी कहुं
ये मुझे पता है तु अस्तित्व में है
ये मुझे नहीं पता,तू कौन है, कैसा है
किस रुप में हे इश्वर तुझे देखु मैं
किस रुप में हे इश्वर तुझे पुजु मैं
पिंड में तू, ब्रम्हांड भी तू
हर क्षण में तू,कण कण में भी तू
आदि तू ,अंत तू, अनादी भी तू
सचर में तू ,अचर में तू ,चरचर में भी तू ही तू
तु हर कहीं है पर कहीं नही
इंद्रियों के परे है तू
मन बुद्धि के भी परे है तू
जहाँ सोचू वहॉं है बस तु ही तू
जहाँ देखु वहॉं है बस तु ही तू
क्या ते रे सिवा कुछ है भी यहाँ ?
बस तु ही तू और कुछ नहीं यहाँ
ऐसा है जब तो  एक कृपा कर इश्वर
अपने आपको तु मुझसे प्रकट कर
चाहे तो फिर अस्तित्व तेरा ईश्वर
क्षण के लिए तू मुझसे विलग कर
मगर ये कृपा कर इश्वर कृपा कर
अपने आपको तु मुझसे प्रकट कर
तु कौन है बस एक बार प्रकट कर
तु कौन है बस एक बार प्रकट कर

 

मंगलवार, /१२/२४१५:१० hrs.
अजय सरदेसाई (मेघ)
 

Sunday, 1 December 2024

जयकाल महाकाल विक्राल शंभो( Inspired from "JayKaal Mahakaal" song of move GOOD BYE


जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
 
तेरा महिमा कौन समझ पावे।
नही ऐसा कोई जो तुमसे छिप पावे।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
डमडमडम डमरु का जब नाद आवे।
उस नाद से काल आगे को बढ जावे ।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
तेरी शरण मे जब कोई शरणांगत आवे।
कभी भी हो ऐसा वो विन्मुख जावे।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
तांडव से तेरे प्रलय भिषण आवे।
जिससे ब्रम्हांड नष्ट हो जावे।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
जटाओं से अपनी भैरव को उपजावे।
भैरव से दुष्टों का संघार करावे।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
जब लावे अकस्मात संकट कोई बैरी।
जो संकट में ढाल बने वो ढाल तुम हो।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
मै मुढ कैसे तेरा बखान गाऊं।
जो कंठ गाए वो आवाज तुम हो।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
तुझे समझ पाऊ ऐसी बुद्धी मुझे दो।
तुझे देख पाऊ ऐसी दृष्टी मुझे दो।।
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल
जयकाल महाकाल विक्राल शंभो।
मै भक्त तेरा,मेरे सबकुछ ही तुम हो।।
 
रविवार, /१२/२४१८:१३ hrs.
अजय सरदेसाई (मेघ)