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Tuesday, 18 August 2026

बन्सी सुना रे तोरी कान्हा ।


चाहे मोहे गोपियन ही बना तू कान्हा,
पर मोहे बंसी सुना रे तोरी कान्हा।

मन मोर रंग्यो रे भक्ती रंगी,
मोहे तोहे प्रेम रंग रंगा, मोरे कान्हा।
बहुत जन्मो से मैं तोरी बाट देख खड़ा हूं,
कब होगा इश और भक्त मिलन रे कान्हा।

चाहे मोहे गोपियन ही बना तू कान्हा,
पर मोहे बंसी सुना रे तोरी कान्हा।

बीते जुग नजाने कितने, अखियाँ थकी रे,
अब तो चले आओ द्वार, मोरे कान्हा।
तन मन अरपन कर दिया तोरे चरणन में,
अब कोई और चाह नहीं मोहे कान्हा।

चाहे मोहे गोपियन ही बना तू कान्हा,
पर मोहे बंसी सुना रे तोरी कान्हा।

प्रेम की डोर से बांध लिया तूने मोहे,
अब तो मैं तोरा, तू ही मोरा, कान्हा।
आ जा अब आंगन मोरे, बांसुरी बजा,
पूरण कर दे जन्मो की आस, मोरे कान्हा।

चाहे मोहे गोपियन ही बना तू कान्हा,
पर मोहे बंसी सुना रे तोरी कान्हा।

मंगलवार, १८/८/२६ , ३:०० PM
अजय सरदेसाई -मेघ