कोई कृष्ण कृष्ण बोले, कोई गोविंद गोविंद बोले,
कृष्ण कहो या गोविंद कहो, सुख दोनों में मिले॥
कृष्ण कहो या गोविंद कहो, सुख दोनों में मिले॥
कोई श्याम श्याम ध्यावे, कोई हरि हरि गावे,
जिस नाम में मन रम जाए, आनंद उसी में मिले॥
कोई मुरलीधर को पुकारे, कोई नंदलाला बोले,
नाम भले ही हों दो प्यारे, प्रेम वही मन खोले॥
कोई गिरिधर गिरिधर गाए, कोई बांके बिहारी बोले,
कोई माधव मन में ध्यावे, हर नाम में हरि ही खिले॥
मंदिर मंदिर एक ही मूरत, हर भक्त का मन डोले,
भाषा चाहे जो भी हो, प्रभु सबकी पीड़ा तोले॥
सभी नाम उसी के हैं, सभी में एक ही सुख घोले,
जिसकी जो हो चाह, वह हरि को उसी नाम से बोले॥
कृष्ण, श्याम, माधव, गिरधर, जो चाहे नाम ले ले,
सभी नाम उसी के हैं ये, कर सुमिरन, पाप धो ले॥
कोई कृष्ण कृष्ण बोले, कोई गोविंद गोविंद बोले,
कृष्ण कहो या गोविंद कहो, सुख दोनों में मिले॥
— अजय सरदेसाई "मेघ"
शुक्रवार, २१/८/२०२६

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