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Friday, 21 August 2026

मैं नाहीं तोसे बोलत श्याम ।


जाओ, मैं नाहीं तोसे बोलत श्याम,

तू कुछ भी कहे या मोहे समझाए श्याम।


रोज़-रोज़ छेड़त, रोज़ करत हो नटखट,

मानूं ना मानूं ना, चाहे रूठ जाए श्याम।


गोपिन के आगे तू करत ठिठोली,

मोहे अकेली छोड़ के, तू कहाँ जाए श्याम।


नैनन में आँसू पर मुख पे है रुसवाई,

मन तो पुकारे तोहे, फिर भी मैं न बुलाऊँ श्याम।


अब खुशी दे या दे तू ग़म, राधा तेरी ही रहेगी,

जितना भी रूठूं मैं, तुझ बिन कहाँ चैन मोहे श्याम।


शुक्रवार, २१/८/२६ , ५:३० PM

अजय सरदेसाई -मेघ

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