हे शारदे, कंठ को मेरे स्वर दे।
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
स्वर-साधना तेरी ही आराधना,
इस साधना को माँ, शुभ आशीष भर दे।
श्वासों में अंबर-सा अटल बल भर दे,
कंठ में वाग्देवी, अपनी कृपा धर दे।
हे शारदे, कंठ को मेरे स्वर दे।
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
ताल, सुर, लय को जीवन में स्थिर कर दे,
राग-रागिनियों से मेरा कंठ भर दे।
शब्द और सुर का ऐसा संगम हो,
भक्ति-रस से भीगा हर एक स्वर दे।
हे शारदे, कंठ को मेरे स्वर दे।
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
हर सुर तेरा हो, हर गीत तेरा हो,
मेरे जीवन को माँ, मधुर स्वर दे।
हे शारदे, कंठ को मेरे स्वर दे,
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
हे शारदे, कंठ को मेरे स्वर दे।
हे सुधे, स्वरों को मेरे मधुर सुर दे।
रविवार, २४/७/२०२६ , ११:११ AM
अजय सरदेसाई -मेघ
