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Saturday, 27 June 2026

तेरी कृपा हो .... (ब्रज भजन )


 

[मुखड़ा]]

तेरी कृपा हो तो फिर,

और क्या कमी है।

तेरे सिवा मेरे लिए,

किस दिल में नमी है॥

 

[अंतरा १]

तू जब-जब प्रेम बरसावे,

मोरे पर।

तपता सूरज भी,

चंदा लागे॥

 

[अंतरा २]

हुई जो तेरी कृपा,

किसी पर।

सौभाग्य भी उसका,

सेवक लागे॥

 

[अंतरा ३]

तेरे चरणन की धूलि भी,

माथे लगावें।

जनम-जनम के पाप सभी,

धुलते जावें॥

 

[अंतरा ४]

तेरी दया की छाँव में,

जो भी आवे।

दुःख की रात भी उसकी,

सवेरा पावे॥

 

[अंतरा ५]

तेरे नाम की माला,

जपूँ हर पल।

मन की भटकन सारी,

होवे निश्चल॥

 

[अंतरा ६]

तेरी कृपा मिली तो,

क्या माँगूँ और।

तू ही मेरा घर है,

तू ही मेरो ठौर॥

 

शुक्रवार , २७/६/२०२६ , ९:५५ AM

अजय सरदेसाई - मेघ