[मुखड़ा]]
तेरी कृपा हो तो फिर,
और क्या कमी है।
तेरे सिवा मेरे लिए,
किस दिल में नमी है॥
[अंतरा १]
तू जब-जब प्रेम बरसावे,
मोरे पर।
तपता सूरज भी,
चंदा लागे॥
[अंतरा २]
हुई जो तेरी कृपा,
किसी पर।
सौभाग्य भी उसका,
सेवक लागे॥
[अंतरा ३]
तेरे चरणन की धूलि भी,
माथे लगावें।
जनम-जनम के पाप सभी,
धुलते जावें॥
[अंतरा ४]
तेरी दया की छाँव में,
जो भी आवे।
दुःख की रात भी उसकी,
सवेरा पावे॥
[अंतरा ५]
तेरे नाम की माला,
जपूँ हर पल।
मन की भटकन सारी,
होवे निश्चल॥
[अंतरा ६]
तेरी कृपा मिली तो,
क्या माँगूँ और।
तू ही मेरा घर है,
तू ही मेरो ठौर॥
शुक्रवार , २७/६/२०२६ , ९:५५ AM
अजय सरदेसाई - मेघ
