Total Pageviews

Thursday, 25 June 2026

तू निरंजन ( हिंदी बंदीश)



स्थायी(मुखडा)

तू निरंजन, तू भवभय भंजन श्याम,
कर्म विमोचन, नैनन रंजन श्याम॥

अंतरा १ (विरहाची सुरुवात)

कब से आस लिये बैठा हूँ श्याम,
तेरी बाँसुरी के सुने बड़े बखान॥
श्रवण प्यासे तेरी मधुर तान को,
सुनाओ मोहन, दो मन को विश्राम॥

अंतरा २ (विरहाची तीव्रता)

विरह अगन जलत उर भीतर,
सुमिरत नाम सुबह औ शाम॥
दीनन के तुम पालनहारे,
काहे मोहि तरसावत श्याम॥

अंतरा ३ (कृपेची याचना)

कलि-कलेस सों राखो मोहे,
हरो मनोमल, दीजो विश्राम॥
दीन दयाल कृपा निधान तुम,
राखो लाज अब मोरी श्याम॥

अंतरा ४ (पूर्ण शरणागती – चरमबिंदू)

चरणन लागी अरज हमारी,
'मेघ' कहे, दिजो दरस घनश्याम॥

समारोप (स्तयी पुनरागमन)

तू निरंजन, तू भवभय भंजन श्याम,
कर्म विमोचन, नैनन रंजन श्याम॥

गुरुवार, २५/६/२६ , ११:३० AM
अजय सरदेसाई -मेघ

No comments:

Post a Comment